ATUL DEPAK

'Faman afa wa a-salah fa-ajruhu ala-Allahi’ (But whoever forgives & makes reconciliation-his/her reward is due from Allah)

DEVANAGRI/SANSKRITISED

क़ौमी तराना 

चीन-ओ-अरब हमारा, हिन्दोस्ताँ हमारा

मुस्लिम हैं हम वतन है, सारा जहां हमारा

तौहीद की अमानत, सीनों में है हमारे

आसान नहीं मिटाना, नामों निशा हमारा

दुनिया के बुतकदो में, पहला वो घर ख़ुदा का

हम उसके पासबाँ हैं, वो पासबाँ हमारा

तेग़ो के साये में हम, पल कर जवाँ हुए हैं

ख़ंजर हिलाल का है, क़ौमी निशा हमारा

मगरिब की वादियों में, गूंजी अजान हमारी

थमता ना था किसी से, सैल-ए-रवाँ हमारा

बातिल से दबने वाले, ऐ आसमाँ नहीं हम

सौ बार कर चुका है, तू इम्तहान हमारा

ऐ गुलिस्ताँ-ए-अन्दलुस ! वो दिन है याद तुझको,

था तेरी डालियों पर, जब आशियाँ हमारा

ऐ मौज-ए-दजला तू भी, पहचानती है हमको,

अब तक है तेरा दरिया, अफ़साना-ख़्वा हमारा

ऐ अर्ज़-ए-पाक तेरी, हुरमत पे मर मिटें हम,

है खून तेरी रगों में, अब तक रवाँ हमारा

सालार-ए-कारवाँ है, मीर-ए-हिज़ाज अपना,

इस नाम से है बाक़ी, आराम-ए-जान हमारा

इक़बाल का तराना, बाँग-ए-दरा है गोया,

होता है ज़दा पैमा, फिर कारवाँ हमारा

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मानी (Glossary)

  • जहां– दुनिया, संसार
  • तौहीद– एकता
  • अमानत– निशानी
  • बुतकदो– वह जगह जहां बुतपरस्ती/मूर्तियों की इबादत होती हो
  • पासबाँ– पहरेदार
  • तेग़ो– तलवार
  • जवाँ– जवान
  • हिलाल– चाँद
  • मगरिब– योरोप (पक्षिम)
  • सैल-ए-रवाँ– आगे बढ़ने की ताक़त
  • बातिल– बुराई
  • गुलिस्ताँ-ए-अन्दुलस– स्पेन की वादियाँ
  • आशियाँ– रहने की जगह/आरामगाह
  • मौज-ए-दजला– पानी की मस्त धारा
  • दरिया– नदी
  • अफ़साना-ख़्वा– कहानियों का संग्रह 
  • अर्ज़-ए-पाक– पवित्र ज़मीन/भूमि
  • हुरमत– ग़ैरत/आत्मसम्मान
  • सालार-ए-कारवाँ– कारवाँ का नेता
  • मीर-ए-हिज़ाज– हिज़ाज का राजकुमार ( पैग़म्बर मुहम्मद (स))
  • तराना– गान
  • बाँग-ए-दरा– जंग का गान/युद्ध्भेरी
  • ज़दा– उठना/उरूज
  • पैमा– जारी रहना

TRANSLATION

Central Asia (including China) is ours, Arabia is ours, India is ours

We are Muslims and the whole world is ours

The treasure of Tauheed (Unity) is in our hearts,

It is not easy to wipe out our name and mark.

The first house we liberated from idols is the Kabah;

We are its custodians, and it is our protector

We have grown up in the shadows of swords,

Our mascot is the crescent shaped dagger

Our Azaan (prayer calls)  have reverberated in the valleys of the west,

The force of our flow could not be stopped by anyone

O Skies! we will not be subdued by falsehood,

You have tried (our steadfasteness) a hundred times!

O Gardens of Andalusia(Spain)! Do you remember those days?

When our abode was the nest on your branches?

O, the waves of Tigris (River in Iraq)! Surely, you must be recognising us,

Your river tells our tales even to this day

O Pure soil of Makkah! We have bled and died for your honor,

Our blood flows in your veins until now

The leader of our caravan, is the Prince of Hijaz (Prophet (s))

It is his name that keeps our heart in comfort and peace.

Iqbal’s song is a clarion call

For the caravan to rise and continue the journey once more.

CREDITS

  • Allama Iqbal